Wednesday, October 11, 2017

Hand Image Of Millionaire Bill Gates Palmistry


Hand Image Of Nita Ambani And Mukesh Ambani Palm Reading



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Read - 5 Lucky Signs on hand which makes you wealthy





Hand Lines Of Mukesh Ambani


Nowadays lots of people search for mukesh ambani home in mumbai, foundation, and entrepreneur.

As per Indian palmistry there are few auspicious signs on hand which indicates wealth and fame.  If you want to learn about Hindu Fortunate Signs On Hand then click here   

Richest Man From Singapore - Peter Lim


Hand Image Of Peter Lim



Singaporean business magnate
Peter Lim is a Singaporean business magnate, entrepreneur, philanthropist and investor. Lim, who was one of Singapore's leading stockbrokers, is now a private investor in sectors ranging from palm oil to medicine. Wikipedia
Born: 1953, Singapore
Spouse: Cherie Lim (m. 2007)
Net worth: 2.3 billion USD (2017) Forbes
Children: 2 (from ex-wife Venus Teo)
Residence: Singapore
Education: Raffles Institution

Hand Image Of Anil Ambani Palmistry


ambani horoscope and palmistry report



Read - Sign and lines on hand which indicates poverty and extreme wealth

Anil Dhirubhai Ambani is an Indian business magnate. He is the chairman of Reliance Group (also referred to Reliance ADA Group) which came into existence in June 2005 following a demerger from Reliance Industries Limited. He leads a large number of stock listed corporations including Reliance Capital,  Reliance Infrastructure, Reliance Power and Reliance Communications.  Ambani's net worth was $3.3 billion according to the Forbes billionaire list in the year of 2016.


 

His major business interests in entertainment includes 44 FM radio stations, nationwide DTH business, animation studios, and several multiplex cinemas throughout India. [7] He is married to former Bollywood actress, Tina Munim and has two sons Anmol and Anshul.


After the death of his father in 2002, Anil Ambani took over the reins of Reliance Group with interests in Telecom, Entertainment, Financial Services, Power and Infrastructure.



In 2008, Ambani is also credited with India's largest IPO of Reliance Power which was subscribed in less than 60-second on offer, fastest in the history of Indian capital markets till date.

Ambani made his debut into the entertainment industry with an acquisition of a majority stake in Adlabs Films in 2005, a company with interests in film processing, production, exhibition and digital cinema, the company was later renamed Reliance MediaWorks in 2009.

In 2008 a joint venture worth US$1.2 billion with Steven Spielberg's production company DreamWorks cast Ambani's entertainment business on to a global platform.  Through this link he has contributed to the production of a number of films with Steven Spielberg, including the Academy Award winning film Lincoln in 2012.


मस्तक रेखा के शुरू में द्वीप होना | Hast Rekha



मस्तक रेखा के प्रारम्भ में द्वीप होना

इस द्वीप का निर्णय करना कठिन होता है क्योंकि किन्हीं अन्य रेखाओं में उलझे होने, जोड़ अधिक होने या अन्य कारणों से यह अन्य रेखाओं से मिल जाता है। अत: ध्यान पूर्वक देखकर ही इसका निर्णय लेना चाहिए। (नितिन पामिस्ट )
island mastak rekha par

ऐसे व्यक्ति आपत्ति के समय शीघ्र घबरा जाते हैं तथा पढ़ने में कमजोर एवं मिजाज के चिड़चिड़े होते हैं। यह द्वीप बड़ा होने पर मस्तिष्क रेखा में यदि कोई दूसरा भी दोष हो तो एकदम भोंदू होते हैं। इस अवस्था में, यदि भाग्य रेखा स्वतन्त्र रूप से निकली हो तथा मोटी हो तो ऐसे व्यक्ति व्यवहार के अच्छे नहीं होते। ये किसी की नहीं सुनते और मनमानी करते हैं व माता-पिता के साथ सहयोग नहीं करते। मित्रों में रहना, अधिक खर्च करना, जिम्मेदारी महसूस न करना, घर में सद्-व्यवहार न करना आदि दोष ऐसे व्यक्तियों में पाये जाते हैं। कई बार तो ये दोष बहुत अधिक बढ़ जाते हैं। (नितिन पामिस्ट )

मस्तिष्क रेखा के आरम्भ में द्वीप और उससे कोई रेखा निकल कर बृहस्पति या जीवन रेखा की ओर जाती हो तो यह लक्षण शिक्षा में थोड़ी बहुत रुकावट करता है। इस प्रकार के द्वीप से गले, कान या कान के ऊपर, मस्तिष्क का ऑपरेशन अवश्य होता है। कभी-कभी इस द्वीप से डिम्बाश्य या अण्डकोष में या तो रोग होता है या ये अग अविकसित होते हैं।

हाथ में जंजीरदार मस्तक रेखा होना | Hast Rekha


जंजीरदार मस्तक रेखा

इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा द्वीप से मिलकर बनी हुई दिखाई देती है। यहां भी दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा के सभी लक्षण लागू होते हैं।
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ऐसे व्यक्ति स्वभाव से चिड़चिड़े, कठोर व अपने ही मिजाज के होते हैं। इनका अपने मस्तिष्क पर नियन्त्रण नहीं होता। काम जिम्मेदारी से करने पर भी स्वभाव के कारण श्रेय नहीं मिलता, क्योंकि ये कार्य करके बखान करते हैं। ऐसे व्यक्ति ठोकर लगने पर भी नहीं सम्भलते। होशियार होते हैं साथ ही जिद्दी भी और रूखा व स्पष्ट बोलने की आदत होती है, फलस्वरूप देर से सफल होते हैं तथा इनके सम्बन्ध भी स्थाई नहीं होते और चिड़चिड़ेपन के कारण प्रत्येक कार्य में रुकावट आती है।

जंजीराकार मस्तिष्क रेखा होने पर यदि जीवन रेखा टूटी हुई हो, बुध की उंगली तिरछी एवं भाग्य रेखा मोटी हो तो ऐसे व्यक्ति घोखेबाज होते हैं। दूसरों को फसाकर अपना काम निकालते हैं और लेकर देना नहीं जानते। ऐसे व्यक्तियों से अधिक आत्मीयता व व्यवहार हमेशा हानिकारक होते हैं। यह वायदे के बिल्कुल पक्के नहीं होते, आजकल करते रहते हैं, न ही साफ जवाब देते हैं, न ही मना करते हैं और न उस काम को करते ही हैं।

इनको अधिक गम या खुशी होने पर स्नायु दोष हो जाता है। मस्तिष्क पर बोझ पड़ने, अघिक पूजा करने व ठेस लगने आदि से मस्तिष्क में विकार उत्पन्न हो जाते हैं। मस्तिष्क रेखा जंजीर की तरह व बुध या सूर्य के नीचे अन्य रेखाओं में भी दोष हो या लाल हो तो सिर में दर्द व आंखों में खराबी होती है। यह दोष वास्तव में वंशानुगत होता है, परिवार में कई व्यक्तियों को ऐसा रोग देखा जाता है। स्त्रियों में ऐसा रोग, अधिक सन्तान या गर्भपात होने से होता है।

हाथ की रेखा पर त्रिशूल (Trisul) होना - हस्त रेखा



त्रिशूल हस्तरेखा

त्रिशूल हस्तरेखा 

भारतीय समाज और हिन्दू धर्म में त्रिशूल का एक विशेष स्थान है और ये हिन्दुओ की आस्था से जुड़ा हुआ है । त्रिशूल का नाम या तस्वीर सामने आते ही हम सब के दिमाग में अपने आप भगवान् शिवजी की मूर्ति आ  जाती है क्योंकि त्रिशूल भगवान् शिवजी का शस्त्र माना जाता है ।

त्रिशूल को इंग्लिश में ट्रिडेंट कहते है यानि की ऐसा भाला जिसके तीन मुँह होते है ।

हस्तरेखा और समुद्रीक शास्त्र में त्रिशूल को अत्यंत फलदायक और शुभदायक और शुभ चिन्ह माना गया है ।


सूर्य पर्वत पर त्रिशूल या सूर्य रेखा पर त्रिशूल का महत्व 

सूर्य रेखा व सूर्य पर्वत पर त्रिशूल होने पर व्यक्ति विलासिता पूर्ण जीवन व्यतीत करता है । ऐसे व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्ति के पास हमेशा पैसा रहता है । अथार्थ ऐसे व्यक्ति का आय का स्रोत कभी समाप्त नहीं होता है जैसे यदि एक स्रोत किसी कारणवस बंद हो जाता है तो भगवान् दूसरा खोल देते है । http://indianpalmreading.blogspot.in

अब यहाँ पर ये बात ध्यान रखने वाली है की त्रिशूल उल्टा है या सीधा है यानि त्रिशूल का मुख उंगलियो की तरफ है या हथेली की तरफ है । यदि त्रिशूल का मुख ऊपर की तरफ है तो व्यक्ति भाग्यशाली है और यदि त्रिशूल उल्टा है तो व्यक्ति को त्रिशूल का लाभ प्राप्त नहीं होता है बल्कि उसको जीवन और रोजगार  अड़चनों का सामना करना पड़ता है ।

त्रिशूल की जो शाखा है वो एक जगह से शुरू होनी चाहिए (ज्यादातर एक जगह से ही शुरू होती है ) वो ही त्रिशूल लाभकारी होता है । नितिन कुमार पामिस्ट

यदि सूर्य रेखा पर त्रिशूल है परंतु सूर्य रेखा खंडित है  या दोषयुतक है तो व्यक्ति को त्रिशूल का लाभ कम मिलता है मतलब त्रिशूल के लाभ में भी कमी आ जाती है ।


शनि पर्वत पर त्रिशूल या भाग्य रेखा पर त्रिशूल का महत्व

भाग्य रेखा व शनि पर्वत पर त्रिशूल होने पर व्यक्ति बड़ा व्यापारी या बड़ा अधिकारी होता है (साथ में अच्छी सूर्य रेखा भी हो ) व ऐसा व्यक्ति दानवीर और परोपकारी होता है । अपने धर्म और समाज और जनकल्याण के लिए कार्य करने वाला व्यक्ति होता है ।

चंद्र पर्वत से निकलने वाली भाग्य रेखा पर यदि त्रिशूल है तो व्यक्ति विदेश जाता है और ऐसे व्यक्ति को विदेश से लाभ मिलता है ।

भाग्य रेखा पर बने त्रिशूल की एक शाखा यदि गुरु पर्वत पर चली जाय तो व्यक्ति को अध्धयन और प्रशासनिक क्षेत्र में लाभ मिलता है और यदि एक शाखा सूर्य पर्वत पर चली जाय तो व्यक्ति को कला और संगीत के क्षेत्र में सफलता मिलती है । नितिन कुमार पामिस्ट

हृदय रेखा पर त्रिशूल का महत्व

हृदय रेखा पर बना त्रिशूल व्यक्ति को भावुक बना देता है । ऐसे व्यक्ति को धोखे अधिक मिलते है । ऐसे व्यक्ति को अपने किये हुए काम की प्रशंशा सुनने को कभी नहीं मिलती है । लोग ऐसे व्यक्ति से अपना काम निकाल कर अलग कर देते है जैसे "दूध में से मक्खी को निकाल देते है" ।

ऐसे व्यक्ति को पारिवारिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है । माता-पिता भाई-बहन से भी सुख नहीं मिलता है । भाई और बहन जमीन जायदाद हड़प लेते है । ऐसे व्यक्ति के साथ रिस्तेदार और परिवार वाले विश्वासघात करते है ।

ऐसे व्यक्ति को अपनी पैदाईश के अलावा बाहर अच्छा मान सम्मान मिलता है लेकिन जहा उसकी पैदाइश हुई होती है वहां उसको संघर्ष ही करना पड़ता है ।

गुरु पर्वत पर त्रिशूल का महत्व 

गुरु पर्वत पर त्रिसूल व्यक्ति को प्रशानिक क्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता दिलाता है । यहाँ ये बात ध्यान रखें की त्रिशूल को किसी अवरोध या आदि रेखा ने काटा नहीं हो वरना त्रिशूल के प्रभाव में कमी आ जाती है ।

यदि त्रिशूल के बारें और अधिक जानकारी चाहते हो तो नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें :

त्रिशूल और भारतीय हस्तरेखा शास्त्र


नितिन कुमार पामिस्ट



हथेली में गुरु या वृहस्पति (Jupiter) क्षेत्र - Hastrekha Shastra


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हथेली पर तर्जनी के मूल स्थान में यह निम्न मंगल-क्षेत्र से ठीक ऊपर होता है। गुरु अधिकार, लेखन, संचालन एवं नेतृत्व के क्षेत्र में जातक को प्रेरित करते हैं। यदि हस्तरेखाओं में से मस्तिष्क रेखा सुंदर एवं सुस्पष्ट हो तो जातक में उपरोक्त गुणों की संभावना और बढ़ जाती है।

मस्तिष्क रेखा सुस्पष्ट होने के साथ-साथ गुरु का क्षेत्र उभरा हो, गुरु पर्वत अन्य ग्रह पर्वतों से अपेक्षाकृत अधिक उन्नत जान पड़े तो समझे जातक देवतुल्य मानव है। ये अपने साथ-साथ दूसरों को भी उन्नति के पथ पर देखना चाहते है। उन्हें मार्गदर्शन करने में इनकी प्रसन्नता होती है। ये न्याय के पक्षधर होते हैं, जहाँ भी होंगे इन गुणों के अधिकारी होने के नाते समाज या कार्यालय में इन्हें न्यायिक माना जाता है। ये अपने दिए वचनों को निभाते हैं। धोखाधड़ी से काफी घृणा होती है। बल्कि ऐसा करनेवालों के विरोध में खड़ा होकर नुकसान उठाते हैं लेकिन अन्याय सहने की क्षमता इनमें नहीं होती। ये धार्मिक स्वभाव के होते हैं एवं जिनसे बात करते हैं उन्हें अपने अनुकूल बना लेने की क्षमता इनमें अजीब होती है।

विपरीत लिंग (योनि) वालों के प्रति इनमें सद्भावना होती है। यदि जातक पुरुष हो तो सभ्य एवं सुंदर स्त्री के साथ मधुर संबंध हो जाना स्वाभाविक होता है। ये अर्थोपार्जन की अपेक्षा यश और प्रतिष्ठा को स्थान अधिक देते हैं। जातक का जन्म 21 नवंबर से 20दिसंबर के बीच हो या अधिक से अधिक 29 दिसंबर तक भी हो तो उपरोक्त गुण निश्चित रूप से प्रमाणित होंगे। ये राजनीति में संलग्न रहना पसंद नही करते बल्कि अपने कामों में लगे रहना ही इनका सिद्धांत होता है। साहित्य के क्षेत्र में सफलता मिलती है।

पर ध्यान रहे, गुरु का क्षेत्र यदि अति उभारयुक्त हो तो व्यक्ति परम स्वार्थी एवं अहंकारी होता है। इस पर्वत के अभाव में जातक पूर्ववर्णित गुणों से वंचित रहते हैं। आत्मगौरव की कमी होती है।

हस्तरेखा ज्ञान हिंदी में सीखें | Hast Rekha | Indian Palmistry


आओ सीखें हस्तरेखा ज्ञान हिंदी में सीखें 
hatheli ki rekha

हस्तरेखा से आप अपना खुद का भविष्य खुद जान सकते है इसके लिए आपको किसी भी ज्योतिषी के पास जाने की जरुरत नहीं है बस हाथ की रेखाओ को समझना होगा। हाथ में रेखाओ का जाल बना हुआ है लेकिन ये बहुत सरल है आप खुद से जान सकते हो आपकी शादी कब होगी और कितने बच्चे होंगे क्युकी सबकी अपनी अलग रेखा होती है। इसलिए तो हस्तरेखा को सम्पूर्ण विज्ञानं कहा गया है। आप सबकुछ अपनी हाथो की लकीरो से जान सकते हो की नौकरी कब लगेगी, सरकारी मिलेगी या नहीं , पत्नी कैसी होगी, पति कैसा होगा , ससुराल कैसी मिलेगी , अमीर घर में शादी होगी या मिडिल क्लास में होगी , हेल्थ कैसी रहेगी और बाकी सबकुछ जो भी समस्या है उसका समाधान हस्तरेखा से आपको मिल जायगा।

करतल पर दृष्टि डालने के साथ ही कुछ रेखायें दृष्टि गोचर होती हैं। ये रेखायें आड़ी हो सकती हैं सीधीहथेली को दो भागों में बांटती हुई हो सकती हैं, अर्ध चंद्राकार या खड़ी रेखायें हो सकती हैं। कभी-कभी तो हाथ में इस प्रकार की रेखाओं का जाल सा बना दिखायी देता है। इन रेखाओं के आधार पर ही किसी जातक के चरित्र, स्वभाव, योग्यता तथा जीवन में घटने वाली घटनाओं का ज्ञान किया जाता है। इस प्रकार की समस्त रेखाओं की संख्या 14 होती है। इनमें सात रेखाओं को मुख्य रेखायें तथा शेष सात रेखाओं को सहायक रेखाएं कहा जाता है। इनका वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जाता है :


आओ सीखें हस्त ज्ञान


मुख्य रेखायें :
1. जीवन रेखा (Jeevan Rekha/Jivan Rekha)
2. भाग्य रेखा (Bhagya Rekha/Shani Rekha)
3. मस्तिष्क रेखा (Mastak Rekha/Mastisk Rekha)
4. हृदय रेखा (Hridhya Rekha/Hridya Rekha)
5. सूर्य रेखा (Surya Rekha/Ravi Rekha)
6. स्वास्थ्य रेखा (Swasthaya Rekha/Vyapaar Rekha)
7. विवाह रेखा (Vivah Rekha/Prem Rekha)

सहायक रेखाये :
1. संतान रेखा (Santaan Rekha/Baccho Ki Rekha)
2. बुध रेखा (Budh Rekha/Vyapaar Rekha)
3. शुक वलय (Shukar Valay)
4. मंगल रेखा (Mangal Rekha)
5. विवाह रेखा (Vivah Rekha/Prem Rekha)
6. मणिबन्ध का तीसरा बन्ध (Manibandh Rekha)
7. प्रेरणा रेखा (Preranna Rekha)


रेखाओं के अध्ययन में करतल के समान ही रंग का भी महत्व होता है। यह आवश्यक नहीं है कि हथेली तथा करतल रेखाओं के रंगों में एकरुपता हो। कई बार हथेली तथा रेखाओं के रंग में भिन्नता स्पष्ट रुप से दिखायी देती है। परन्तु प्रायः ही इसके लिये विशेष दृष्टि की आवश्यकता होती है। यह विशेष दृष्टि विभिन्न प्रकार के हाथों के निरन्तर अध्ययन तथा साधना से ही सम्भव होती है। मुख्य रेखाओं में जीवन रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा, भाग्य रेखा तथा स्वास्थ्य रेखा आदि सम्मिलित हैं। कहीं-कहीं इस रेखा को अन्तज्ञान रेखा अथवा लाईन आफ इन्टीयूशन भी कहा गया है। इसी रेखा को व्यापार रेखा भी कहा जाता है।

सहायक रेखाओं में सूर्य रेखा, आदि रेखाओं का समावेश होता है। इन दो प्रकार की रेखाओं के अतिरिक्त हथेली पर पर्वत क्षेत्र को घेरते हुए कुछ रेखाय होती है । इन्हें मुद्रिका कहा जाता है ।
यह चार प्रकार की होती है बृहस्पति मुद्रिका, शनि मुद्रिका, बुध मुद्रिका, सूर्य मुद्रिका , और शुक्र मुद्रिका ।

हाथ देखते समय हथेली की रेखाओ का जितना गंभीरता और गहराई से अध्ययन किया जायगा फलकथन में उतनी ही अधिक आसानी होगी ।

रेखाओ के चिन्ह विस्तार और वर्गीकरण -

1. रेखा किस स्थान से निकल कर किस और जा रही है । उसका रंग, लंबाई, चौड़ाई, उदय, अंत, स्थान, दिशा किस प्रकार के है । उसकी सरंचना कैसे है ।

2. हाथ में उपिस्थित अन्य रेखाय के साथ अध्ययन की जा रही रेखा का क्या कैसा सम्बन्ध है ।

3. यह रेखा कही पर टूटी है, झुकी हुई है, टेडी मेड़ी है मोती है या कही पर बारीक़ है, पतली है । हथेली में जिस रेखा अध्यन किया जा रहा है वह मोटी , पतली, महीन, छोटी, लंबी आदि किस प्रकार की है ।

4. अध्ययन की जा रही रेखा के प्रारम्भ एवं अंत में किस प्रकार की आकृतिया बनी हुई है । स्वयं रेखा पर किस प्रकार के चिन्ह उपिस्थत है ।

5. क्या कोई रेखा किसी दूसरे स्थान से आकर इस रेखा को काट रही है इससे छू रही है इस से मिल रही है इस रेखा की शाखाओ की स्थिति किस प्रकार की है ।

6. क्या कोई अत्यंत महीन रेखा इस रेखा के अत्यन्त समीप जा रही है? इसके समानान्तर है? इस प्रकार की निकटवर्ती अथवा समानान्तर रेखाओं का फलादेश पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

7. हाथ में रेखायें केसी हैं। इकहरी हैं या दोहरी | हाथ में अधिकतर रेखायें दोहरी होने पर व्यक्ति की सफलता देर से मिलती है। परन्तु स्थायित्व प्राप्त करने के बाद उसे अच्छी सफलता मिलती है। सभी रेखायें दोहरी हों तो व्यक्ति जीवन भर संघर्ष करता है। सफलता मिल तो जाती है साथ ही अशान्ति भी बनी रहती है। व्यक्ति का अपने जन्म स्थल से अधिक लगाव होता है।

8. परन्तु एक ही रेखा दोहरी होने से उस रेखा से सम्बन्धित गुणों में वृद्धि हो जाती है। उदाहरण के लिये जीवन रेखा दोहरी होने पर व्यक्ति का कुटुम्ब बड़ा होगा | वह स्वयं दीर्घायु होगा। ध्यान रखिये कि हाथ हुआ हो तो व्यक्ति स्नायु अथवा शारीरिक रुप से निर्बल होता है। ऐसा व्यक्ति अधिक परिश्रम नहीं कर सकता और व्यर्थ चिन्ताओं से धिरा रहता है।

9. अगर हाथ में अधिक रेखायें न हों तो व्यक्ति परिश्रमी होता है और यदि हाथ में मुख्य रेखायें तो हों मगर सहायक रेखायें बिल्कुल न हों तो व्यक्ति अत्यन्त आलसी होता है। स्पष्ट है कि हाथ में रेखाओं का संतुलन अत्यन्त आवश्यक है।

10. कल्पना कीजिये कि हाथ में बनी रेखायें किसी पाईप के समान हैं। यदि पाईप से पानी बह रहा है और उसके बहने की गति सामान्य हे तो पानी निकासी के मार्ग का व्यास कम कर देने पर उससे निकास होने वाले पानी की गति बढ़ जाती हे | यही सिद्धांत हाथ की। रेखाओं पर भी लागू होता है। रेखा जितनी सुडोल एवं महीन होगी उससे प्रवाहित होने वाली जीवनी शक्ति उतनी ही प्रबल होगी | व्यक्ति उतना ही भाग्यवान होगा। हथेली की रेखाओं के मोटा होने पर व्यक्ति का भाग्य देर से बनता है। उसमें भी अपूर्णता दिखायी पड़ती है। उसके स्वभाव में भी अपूर्णता होती है।

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11. हाथ में जो भी रेखा अधूरी होगी मनुष्य के जीवन में उसी रेखा से सम्बन्धित आकांक्षाओं की तीव्रता होती है। उदाहरण के लिये यदि हाथ में मस्तिष्क रेखा अधूरी हो तो व्यक्ति में शिक्षा प्राप्त करने की आकांक्षा बलवती होगी | व्यक्ति इसी आकांक्षा को पूरी करने के लिये सबसे अधिक प्रयत्नशील रहेगा परन्तु उसकी यह आकांक्षा पूरी हो पाती है अथवा नहीं यह हाथ में अन्य लक्षणों पर भी निर्भर करेगा |

12. रेखाओं से फलादेश करते समय जीवन के विभिन्न पक्षों के लिये किसी विशिष्ट रेखा पर ध्यान देना आवश्यक होता हे । साथ ही हथेली की अन्य रेखाओं से उस परिणाम की पुष्टि करना भी आवश्यक होता हे |

13. आर्थिक स्थिति तथा भाग्योदय के सम्बन्ध में भाग्य रेखा, सूर्य रेखा, मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा पर समन्वित रूप से विचार करने के साथ-साथ हथेली, अंगुली, नाखून, ग्रह क्षेत्र की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिये। विद्या, बुद्धि के सम्बन्ध में विचार करते समय सूर्य रेखा, मस्तिष्क रेखा पर ध्यान दीजिये । प्रेम तथा विवाह पर विचार करते मुद्रिका, हृदय रेखा का अध्ययन करें। सन्तान के सम्बन्ध में विचार करते समय विवाह रेखा पर पाई जाने वाली संतान रेखाओं का भी विचार करें। ध्यान रखिये कि हथेली पर स्थित प्रत्येक रेखा भले ही वह गोण हो अथवा सहायक जीवन को विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव छोड़ने में सक्षम होती है।

14. रेखाओं को सामान्यतया चार व गों मोटी पतली, गहरी तथा उथली में विभाजित किया जाता है। आकृति के आधार पर रेखाओं को बारह उपवगों में विभाजित किया जाता है | इस प्रकार के वगीकरण से रेखाओं का अध्ययन सरल हो जाता हे | इन्हें समझने में सुविधा होती है था फलादेश को समझने में पष्टता आती हे |

15. रेखाओं के वगीकरण में प्रत्येक रेखा का नामकरण इस प्रकार किया गया है कि रेखा के नाम से ही उस रेखा के गुणों तथा Iवृति के विषय में ज्ञान हो जाता है। लहरदार रेखा, जजीराकार खा, बिन्दुदार रेखा, फटी हुई खा, द्वीप युक्त रेखा, वर्ग चिन्ह पुक्त रेखा, दोहरी रेखा, शाखा युक्त खा, टूटी हुई रेखा, गोपुच्छाकृति खा, अधोगामी रेखा, उध्र्वगामी (खा अपने नाम को सार्थक करती हैं। रेखाओ के इस वर्गीकरण को चत्राकृति में दिखाया गया है।
नितिन कुमार पामिस्ट  

पति दूसरी औरत के वश में हो तो ये उपाय करें | Pati Aur Dusari Aurat


पति दूसरी औरत के वश में हो तो ये उपाय करें | Pati Aur Dusari Aurat

पति का दूसरी औरत से अलग करना  ( Aadmi Ko Dusari Aurat Se Alag Karna)

यदि आपको लगता है आपके पति आप में कम दिल्चस्प्पी लेते है और बाहर किसी और औरत के साथ उनका प्रेम-प्रसंग यानि की चक्कर चल रहा है और वो दूसरी औरत के साथ सेक्स करते है तो आप ये चमत्कारी उपाय कर के अपने पति को अपने वश में कर सकती हो और दूसरी लड़की के चुंगल से आजाद करा सकती हो।

आज कल अनैतिक सम्बन्ध बहुत बनने लग गए है जिसका कारण है औरतो का मर्दो के साथ काम करना। हलाकि इस में कोई बुराई नहीं है परन्तु मानो या ना मानो ये गैरसंबंध का एक मुख्य कारण है और फिर ऐसे बहुत से और भी कारण है लेकिन उनकी चर्चा यहाँ करना व्यर्थ है इसलिए हम अपने मुद्दे की बात करते है की आप अपने पति को कैसे वापिस अपने प्यार में फंसा ले या कैसे अपने पति का खोया हुआ प्यार हासिल करें।

१) आपके पति आपसे झूठ बोल कर बाहर दूसरी लड़की से मिलते है और सेक्स करते है तो जिस दिन आपको लगे आपके पति उस औरत के पास गए थे और सेक्स कर के आए है तो आपको अपने पति की अंडरवियर को हासिल करना है (धोने से पहले) और बाहर ले जा कर जला देना और बोलना है की आपके पति का उस औरत के साथ अफेयर या सम्बन्ध टूट जाय।  आपको रिजल्ट तुरंत देखने को मिलेगा।

२ ). अपने कुछ सर के बाल ले ले और पति के कुछ सर के बाल ले ले और उनको सामने रख कर के १०८ बार इस मंत्र को बोले "ॐ पिंगलाय नमः" और फिर उन बालो को घर के बाहर जला दे।  आपके पति आपके साथ अच्छा बर्ताव करेंगे और प्यार करने लगेंगे।

३). बाजार से मीठी सुपारी का पैकेट ले कर आ जाना और पति का नाम उस पर २१ बार बोल कर के फूंक मार देना और फिर उस सुपारी को किसी शहद की शीशी में डाल देना और फिर रोजाना अपने पति को वो सुपारी किसी भी चीज़ में डाल कर खिलाती रहना।  आपके पति उस औरत के पास जाना छोड़ देंगे।

४ ).  पति का गुस्सा तेज़ है और घर खर्च को पैसे नहीं  देता है और खुद भी नहीं कमाता है और ऊपर से पराई औरतो के चक्कर में है या दारुबाज है  शराबी है तो ये उपाय करने से आपको लाभ होगा ये टोटका थोड़ा कठिन है लेकिन असरदार है। आपको बाजार से शुद्ध गोरोचन ले आना है , पिसा हुआ मिलता है और अपनी मांग में लगाना है और फिर मांग से ले कर अपने पति के ललाट पर तिलक लगा देना है।  आपका पति आपका गुलाम बन जायगा और सभी बुरी आदते छोड़ देंगे।

५). पति के नाजायज सम्बन्ध तो तोड़ने के लिए शनिवार या मंगलवार को सिंदूर अपनी मांग में भरो और फिर उसको मांग से निकाल कर के अपने पति के खाने में मिला कर खिला दो।  ये एक बार ही करना है। पति प्यार करने लगेगा और वश में रहेगा।

सौतन और शत्रु से पीछा छुड़ाने के लिए आप इस पोस्ट को भी पड़ें और लाभ प्राप्त करें - सौतन और शत्रु से मुक्ति पाने का टोटका 


सिर्फ बेटा या लड़का होना | Putra Prapti Ke Totke | Sirf Beta Ya Ladka Hona


सिर्फ लड़का ही पैदा हो उसका उपाय - पुत्र प्राप्ति का टोटका


सिर्फ लड़का ही पैदा हो उसका उपाय - पुत्र प्राप्ति का टोटका

आपको सिर्फ संतान में लड़किया ही हो रही है और आप पुत्र सुख से वंचित है यानि आपको लड़का नहीं हो रहा है तो आप यहाँ दिए गये सरल उपाय करें आपको लाभ होगा। ये उपाय करने से आपको इस बार लड़का ही पैदा होगा लड़की नहीं होगी।

आपको २ से ३ लड़किया है तो इस बार आपको अवश्य लड़का होगा लेकिन आपको ये उपाय करने होंगे। जो लड़का २ या ३ लड़कियों के बाद जन्म लेता है वह बहुत भाग्यशाली होता है।

लड़का का ही जन्म हो उसके लिए निम्न उपाय करें

१)   सोमवार के दिन किसी भी जड़ी बूटी बेचने वाले से शिवलिंगी का एक बीज और लक्ष्मण बूटी का एक बीज ले कर आ जाय। इन पर २१ बार "ॐ नम: शिवाय :" का पाठ कर के अभिमंत्रित कर ले।  इसके बाद दोनों पति और पत्नी इन जड़ी बूटियों का सेवन कर के सम्भोग (सेक्स) करें। पति को शिवलिंगी का बीज और पत्नी को लक्षमण बूटी का बीज लेना है। ये करने से पुत्र सुख की जरूरी मनोकामना पूरी होगी।

२). अगर पति और पत्नी सेक्स से पहले मन में केवल यह सोचें की हमको संतान में इस बार पुत्र की प्राप्ति होगी और हमारे इष्ट देवता हमको पुत्र का सुख अवश्य देंगे। और इसके बाद पति (आदमी) सम्भोग करने से पहले अपनी औरत की योनि को दाए (सीधे) पैर के अंगूठे से स्पर्श करें और फिर सेक्स करें। ये उपाय करने से भी दम्पति को संतान के रूप में लड़का होता है।

बाजार में बहुत सारी दवाईयाँ उपलब्ध है जो "पुत्रजीवक" (Putra Jeevak Dawa) के नाम से बेची जा रही है और दावा किया जा रहा है की इसके सेवन से सिर्फ लड़का होता है जबकि उसके सेवन से गर्भ बनता है और औरत माँ बनती है।

यदि बार बार गर्भपात हो रहा है तो उसके लिए उपाय यहाँ इस पोस्ट में दिए गए है - गर्भ का नहीं ठहरना ज्योतिष उपाय 


बार बार गर्भपात होना | संतान होने का अचूक टोटका


औरत को बार बार गर्भपात ( बच्चा गिर जाना ) हो जाना

औरत को बार बार गर्भपात ( बच्चा गिर जाना ) हो जाना 

यदि आप संतान सुख से वंचित है और उसका कारण है की आपको गर्भ ठहरता नहीं है यानि एबॉर्शन या मिस्कैरिज हो जाता है तो ये लेख आपके लिए उपयोगी हो सकता है।  यहाँ पर बहुत और बेहद सरल टोटका दिया जा रहा है जिसको करने के बाद आपको माँ बनने का सुख प्राप्त हो सकता है।

आप इस ब्लॉग में गर्भ धारण करने और भी उपाय पढ़कर उनको भी आजमा सकती है लेकिन इस पोस्ट में उन औरतो के लिए उपाय दिया जा रहा है जिनको बार बार गर्भपात हो जाता है।

बार-बार गर्भपात होना अच्छा शकुन नहीं है।  ऐसा क्यों होता है ? इसका कारण क्या है ? इसका कारण है की पिछले जन्म में आपने किसी व्यक्ति या प्राणी की संतान का नाश किया था इसलिए आपको ये दंड इस जन्म में मिल रहा है और अब इसका आयुर्वेदिक और ज्योतिषीय इलाज जरूरी है।

यहाँ में एक दवा और अनुभूत टोटका लिख रहा हूँ। प्रयोग कर लाभ उठाय।

१). मुलेहठी, आवला और सतावर को काटकर इन सबको भली-भांति पीसकर कपड़छन (महीन कपडे से छान ले ) कर ले। इसके बाद इस औषधि को रविवार से आरम्भ करें। इस औषधि को गाय के दूध से सेवन गुणकारी माना गया है। मात्रा लगभग ६ ग्राम सुबह और शाम है। आपको गर्भपात नहीं होगा।

२). मंगलवार के दिन लाल कपडा ले इस में थोड़ा सा सैंधा नमक बांध ले।  इसके बाद हनुमान मंदिर जाय और इस पोटली को हनुमानजी के पैरो से स्पर्श कराय और वापिस आ कर गर्भिणी अपने पेट से बांध ले। गर्भपात तुरंत बंध हो जायगा।

आप इस पोस्ट को भी जरूर पड़ें - जल्दी माँ कैसे बनें या गर्भ धारण कैसे करें 


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Answer: Contact me at Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in.


Question: I want to know what includes in Palm reading report?

Answer: You will get detailed palm reading report covering all aspects of life. Past, current and future predictions. Your palm lines and signs, nature, health, career, period, financial, marriage, children, travel, education, suitable gemstone, remedies and answer of your specific questions. It is up to 4-5 pages.



Question: When I will receive my palm reading report?

Answer: You will get your full detailed palm reading report in 9-10 days to your email ID after receiving the fees for palm reading report.



Question: How you will send me my palm reading report?

Answer: You will receive your palm reading report by e-mail in your e-mail inbox.



Question: Can you also suggest remedies?

Answer: Yes, remedies and solution of problems are also included in this reading.


Question: Can you also suggest gemstone?

Answer: Yes, gemstone recommendation is also included in this reading.


Question: How to capture palm images?

Answer: Capture your palm images by your mobile camera or you can also use scanner.


Question: Give me sample of palm images so I get an idea how to capture palm images?

Answer: You need to capture full images of both palms (Right and left hand), close-up of both palms, and side views of both palms. See images below.



Question: What other information I need to send with palm images?

Answer: You need to mention the below things with your palm images:- 



  • Your Gender: Male/Female 
  • Your Age: 
  • Your Location: 
  • Your Questions: 

Question: How much the detailed palm reading costs?

Answer: Cost of palm reading:


  • India: Rs. 600/- 
  • Outside Of India: 20 USD

( For instant palm reading in 24 hours you need to pay extra Rs. 500 or 15 USD ) 
(India: 600 + 500 = Rs. 1100/-)
(Outside Of India: 20 + 15 = 35 USD) 

Question: How you will confirm that I have made payment?

Answer: You need to provide me some proof of the payment made like:

  • UTR/Reference number of transaction. 
  • Screenshot of payment. 
  • Receipt/slip photo of payment.

Question: I am living outside of India so what are the options for me to pay you?

Answer: Payment options for International Clients:

International clients (those who are living outside of India) need to pay me 20 USD via PayPal or Western Union Money Transfer.

  • PayPal (PayPal ID : nitinkumar_palmist@yahoo.in)
    ( Please select "goods or services" instead of "personal" )
  • PayPal direct link for $20 (You will get reading in 9/10 days) - PayPal Payment 20 dollars
    PayPal direct link for $35 (You will get reading in 24 hours) - PayPal Payment 35 dollars
  • Western Union: Contact me for details.

Question: I am living in India so what are the options for me to pay you?


Answer: Payment options for Indian Clients:

  • Indian client needs to pay me 600/- Rupees in my SBI Bank via netbanking or direct cash deposit.

  • SBI Bank: (State Bank of India)
       Nitin Kumar Singhal
       A/c No.: 61246625123
       IFSC CODE: SBIN0031199
       Branch: Industrial Estate
       City: Jodhpur, Rajasthan. 



  • ICICI BANK: 
      (Contact For Details)

Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in




Client's Feedback - DECEMBER 2017



If you don’t have your real date of birth then palmistry is there to help you for future life predictions.  Our palm lines, signs, mounts and shapes which are very useful in predicting the person’s life. We can predict your future from the lines and signs of your both palms. We can predict your future by studying your palm lines and signs. There is no need to send us your date of birth , time of birth , place of birth etc . Palm told the personality ,future ups and downs thus a experienced palmist can guide you to deal with upcoming challenges with vedic remedies.