Saturday, September 30, 2017

औरत-आदमी के तिल होना | TIL VICHAR


औरत - आदमी के विभिन्न अंगो पर तिल होने का प्रभाव क्या होता है 
हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर पर कई प्रकार के जन्मजात अथवा जीवनकाल के दौरान निकले निशान होते हैं। जिसे हम तिल एवं मस्सा कहते हैं। ये तिल और मस्से हमारे भविष्य और चरित्र के बारे में दर्शाते हैं। शरीर पर तिल हो तो मनुष्य को यह जानने की जिज्ञासा होती है कि इसका क्या अर्थ है…? आइये जानते हैं शरीर के विभिन्न अंगों पर पाए जाने वाले तिलों के बारे में…
औरत के विभिन्न अंगो पर तिल

जानें इन तिल का मतलब:  

ललाट पर तिल होने का मतलब
  • माथे के बीचों-बीच में होना मतलब मिर्मल प्रेम की निशानी है।
  • ललाट पर दायीं ओर तिल धन वृद्धिकारक का सूचक है।
  • वहीं बायीं ओर घोर निराशापूर्ण जीवन का सूचक है।

कान पर तिल होने का मतलब

  • दाएं कान पर तिल- जिन लोगों के दाएं कान पर तिल होता है वह कम उम्र में ही धनवान हो जाते हैं।
  • इतना ही नही व्यक्ति का जीवनसाथी भी सुंदर होता है।
  • बाएं कान पर तिल- जिन लोगों के दाएं कान पर तिल होता है, उनमें रहस्यमयी होने के गुण को दर्शाता है।
  • ऐसे लोगों का विवाह अधिक उम्र होने के पश्चात् होता है।
  • बाएं कान के पीछे की तरफ़ तिल होना व्यक्ति के गलत कार्यों के प्रति झुकाव को दर्शाता है।

होंठ पर तिल होने का मतलब

  • अगर ऊपरी होंठ के दायीं तरफ हो तो जीवनसाथी का पूर्ण साथ निलता है।
  • वहीं बायीं तरफ तिल होना जीवनसाथी के साथ लगातार विवाद होने का सूचक है।
  • निचले होंठ के दाएं तरफ तिल हो तो व्यक्ति अपने क्षेत्र में बहुत प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं।
  • बायीं तरफ तिल होना किसी विशेष रोग के होने का सूचक होता है।
  • ऐसे व्यक्ति अच्छे खाने तथा नए कपड़े पहनने के शौकीन होते हैं।

पीठ पर तिल होने का मतलब

  • जिन लोगों के पीठ पर तिल होता है उनमें पीठ पीछे बुराई करने के लक्षण होते हैं।
  • अगर पीठ में तिल हो तो उस व्यक्ति का जीवन दतूसरों के सहयोग से चलता है।

पैर पर तिल होने का मतलब

  • दायीं पैर पर तिल- सीधे पैर में तिल होने का मतलब है कि उसे उद्देश्यपूर्ण यात्राएं करनी पड़ती है।
  • बायें पैर पर तिल- उल्टे पैर में तिल होने का मतलब है कि बिना किसी उद्देश्य के फालतू में करना।

Hastrekha Mein Tribujh Ka Matlab




Tribujh Aur Hast Rekha ( Meaning of Triangle In Palmistry )


Tribujh Jeevan Rekha Ya Aayu Rekha Par (Triangle On Lifeline)

Yadi vykti ke right hand ki lifeline ke starting mein triangle sign hai to aisa triangle us vykti ki bimari se suraksha karta hai bachpan mein aur yadi aisa triangle jeevan rekha ke end mein  health line se bana ho aise vykti ki mrityu lambi bimari ke baad hoti hai.  Yadi triangle lifeline ke center mein ho to aise vykti us tribujh ke karan rog-shok or mrityu ke bhay se chutkara paa leta hai.

Yadi vykti ke hath mein headline pr triangle hai to wo bahut shubh mana jata hai.  Agar headline ki starting mein triangle hai to bachpan mein wo vykti hosiyaar hota hai.  Yadi triangle fate line or headline se ban raha ho to aisa vykti dharmik karyo mein roochi leta hai. Yadi triangle health line or headline se ban raha ho to aise vykti ko mansik chinta bani rahati hai.

Yadi vykti ke hath mein heartline pr triangle surya rekha ki madad se ban raha hai to aisa vykti pratibhashaali hota hai.  Yadi hridya rekha pr tribhuj jeevan rekha se ban raha hai to aisa vykti dhanwan hota hai.  Yadi triangle heartline pr health line se ban raha hai to aise vykti ko blood se related disease hoti hai.

Yadi vykti ke hath mein triangle sun line pr hai to aise vykti ko kala ki field mein safalta milti hai.

Yadi vykti ke hath mein triangle fate line pr hai to aisa vykti jeevan mein ek jaisa jeevan jeena pasand karta hai.

Yadi vykti ke hath mein triangle health line pr hai to aise vykti ko lambi bimari ka samna karna padta hai.

Yadi vykti ke hath mein tringle mars line pr hai to aise vykti ka sahas dugna ho jata hai.

Yadi vykti ke hath mein triangle travel line pr hai to aise vykti yatra ke dauran durghatana ka samna karna padta hai lekin wo bach jata hai.

Ye bhi padein:-Tribhuj Parvato Aur Rekhao Par Kya Matlab Hota Hai


त्रिभुज का रेखाओ और ग्रहो पर प्रभाव | Hast Rekha Gyan


त्रिभुज की परिभाषा और फल

त्रिभुज - हम सभी जानते है की त्रिभुज या त्रिकोण तीन रेखाओ को मिल कर बनता है। त्रिभुज की तीनो रेखाय जितनी साफ़ और सुन्दर होगी उतना ही अच्छा फल मिलेगा। इसके विपरीत त्रिभुज की रेखाय यदि अस्पष्ट है तो व्यक्ति को उसका लाभ नहीं मिलता है।

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किसी भी जातक के हाथ में त्रिभुज का होना अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा व्यक्ति विवेकशील, दूरदर्शी, और क्रियाशील होता है।  त्रिभुज जिस भी क्षेत्र में होता है उस क्षेत्र के गुणों में वृद्धि कर देता है।


त्रिभुज का गुरु या बृहस्पति पर फल 

गुरु पर्वत पर त्रिभुज बहुत कम पाया जाता है।  फिर भी जिन हाथो में त्रिभुज गुरु पर्वत पर विद्यमान है वह व्यक्ति उच्चभिलाषी , सफल राजनीतिज्ञ , और धार्मिक गुरु बन सकता है। ऐसा व्यक्ति जनता का सेवक होता है और जनता के लिए कार्य करता है।

गुरु पर्वत पर त्रिभुज चिन्ह व्यक्ति को यश, मान-सम्मान , और विदेश यात्रा करवाता है।

त्रिभुज के दूषित हो जाने यानी किसी रेखा से इसको काट दिया जाय तो इसके फल में कमी आ जाती है और व्यक्ति घमंडी हो जाता है।


त्रिभुज का शनि पर्वत पर फल 

यदि किसी व्यक्ति के हाथ में  छोटा सा त्रिभुज शनि पर्वत पर सुन्दर साफ़ स्पष्ट तथा निर्दोष रूप से विद्यमान हो तो वह व्यक्ति तंत्र विद्या में माहिर होता है।  ऐसा व्यक्ति तांत्रिक, ज्योतिष, गुप्त विद्याओ को सीखने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति लाटरी, जुए का भी शौकीन होता है।

अगर यही त्रिभुज दूषित हो जाय तो व्यक्ति ठग बन जाता है और लोगो को लूटने का काम करता है।


त्रिभुज का रवि या सूर्य पर्वत पर फल 

यदि किसी व्यक्ति के हाथ में त्रिभुज रवि पर्वत के नीचे या क्षेत्र पर है तो ऐसा व्यक्ति धार्मिक, परोपकारी , समाजसेवक, कुशल वैध, अच्छा चित्रकार, कलाकार और प्रतिभा का धनि होना है।

ऐसा व्यक्ति हर कार्य में सफलता ही प्राप्त करता है और जो इसके साथ जुड़ते है उनका भी भला हो जाता है।

यदि त्रिभुज दूषित है तो व्यक्ति को अपयश मिलता है और वो ज्यादातर उसकी कला से सम्बंधित ही होता है।


त्रिभुज का बुध पर्वत पर फल 

यदि त्रिभुज पर्वत पर है तो व्यक्ति को साइंस में रुचि रहती है।  ऐसा व्यक्ति सफल व्यापारी होता है। अच्छा वकील, प्रवक्ता होता है। अच्छा कूटनीतिज्ञ और सलाहकार होता है। लेकिन ऐसे लोग पैसा जोड़ नहीं पाते है और खर्च कर देते है। 

यदि त्रिभुज कटा हुआ या टूटा हुआ है तो वह व्यक्ति सिर्फ बातो का राजा होता है और असल जिंदगी में कुछ हासिल नहीं कर पता है कारण वह सिर्फ टाइम पास करता है।


त्रिभुज का चंद्र पर्वत पर फल 

यदि त्रिभुज चंद्र क्षेत्र में है तो वह व्यक्ति काल्पनिक होता है।  ऐसा व्यक्ति अच्छा चित्रकार , दस्तकार , मूर्तिकार , प्रकृति से प्रेम करने वाला और मिलनसार होता है। अपने हुनर से नाम बनाता है।

यदि ये त्रिभुज अच्छा नहीं है तो वह व्यक्ति शेख़चिल्ली की भांति बन कर रह जाता है और जगह जगह अपना उपहास बनवाता फिरता है। 


त्रिभुज का केतु पर्वत पर फल

केतु क्षेत्र पर त्रिभुज अत्यंत लाभकारी होता है ऐसे में व्यक्ति को बाल्यकाल से भी सबकुछ प्राप्त होने लगता है। पैतृक सम्पति का सुख मिलता है और परिवार के नाम और हैसियत का बहुत लाभ मिलता है।

लेकिन खराब त्रिभुज होने पर बचपन भी नीरसता से गुजरता है और पैतृक सम्पन्ति होते हुए भी नहीं मिलती है।


त्रिभुज का जीवन रेखा या आयु रेखा पर फल

यदि किसी मनुष्य के दाहिने हाथ की जीवन रेखा के आरम्भ में त्रिभुज का चिन्ह स्पष्ट और सुन्दर और साफ़ है तो उस समय ऐसा त्रिभुज उस व्यक्ति की प्राणो की रक्षा करता है।  ऐसा व्यक्ति बचपन में बीमार होता है लेकिन त्रिभुज उसको अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है मतलब बीमार होने पर भी व्यक्ति में ऊर्जा बनी रहती है।  ऐसे व्यक्ति की मृत्यु लम्बी बीमार के पश्चात ही होती है।


त्रिभुज का शीश रेखा या मस्तक रेखा पर फल

शीश रेखा पर त्रिभुज को सबसे भाग्यशाली माना गया है।  ऐसा व्यक्ति अपने दिमाग के दम पर बहुत अच्छी तरक्की करता है और बहुत नाम और पैसा बनाता है।

ऐसा व्यक्ति बिज़नेस और नौकरी में बहुत बड़ी ओहदे पर होता है। ऐसे व्यक्ति के पास काफी बैंक बैलेंस और प्रॉपर्टी होती है।

लेकिन यदि त्रिभुज दूषित है तो व्यक्ति को चिंता लगी रहती है और आय से ज्यादा व्यय होता है।


त्रिभुज का हृद्य रेखा पर फल

 यदि त्रिभुज हृदय रेखा या हृदय रेखा पर बन रहा तो व्यक्ति को जीवन के अंतिम क्षणों में लाभ प्राप्त होता है। ऐसा व्यक्ति मध्य आयु के पश्चात अमीर बनता है।  ऐसा व्यक्ति बहुत पढ़ा -लिखा होता है।

यदि त्रिभुज दोषयुक्त है तो व्यक्ति को हृद्यघात होता है और ऐसे व्यक्ति को प्रेम में निराशा की वजह से दुःख और पीड़ा उठानी पड़ती है।


त्रिभुज का रवि  रेखा या सूर्य रेखा पर फल

यदि किसी मनुष्य के दाहिने हाथ में अनामिका ऊँगली के तृतीया पोरे के साथ रवि रेखा पर कोई त्रिभुज बन जाय तो व्यक्ति को लेखन में सफलता मिलती है।  किन्तु ख्याति अंतिम समय में मतलब बहुत लेट मिलती है। ऐसे व्यक्ति एकाकी जीवन जीते है।

त्रिभुज अच्छा न होने पर ऐसे व्यक्ति मुफत होते है और हठी होते है और अपने हाथो ही अपना कैरियर खत्म कर लेते है।

नोट: बाकी सभी क्षेत्रो और रेखाओ का विवरण जल्द दिया जायगा। 

त्रिभुज का स्वास्थ्य रेखा पर फल

त्रिभुज का विवाह रेखा पर फल

त्रिभुज का यात्रा रेखा पर फल

त्रिभुज का चंद्र  रेखा पर फल

त्रिभुज का मंगल रेखा पर फल

त्रिभुज का सुमन रेखा व प्रभाव रेखाओ पर फल

जीवन रेखा का स्थान और अर्थ | Indian Palmistry


जीवन रेखा का स्थान और अर्थ


jeevan rekha life lineहथेली में जीवन रेखा ( लाइफ लाइन ) तीन प्रमुख लाइनों में से एक है ( दूसरी दो प्रमुख रेखा मस्तक रेखा और हृदय रेखा है ) यह अंगूठे और तर्जनी के बीच हथेली के किनारे से शुरू होती है और अंगूठे के आधार तक फैली हुई होती है। आप तस्वीर से अपने हाथ में जीवन रेखा का स्थान देख सकते हैं। अंग्रेजी में इसको Life Line बोलते है। 

अधिकांश लोग सोच सकते हैं कि इस लाइन का उपयोग व्यक्ति के जीवन की अवधि को देखने के लिए किया जाता है। यह एक आंशिक समझ है वास्तव में, यह मुख्य रूप से व्यक्ति की शारीरिक जीवन शक्ति और जीवन ऊर्जा को दर्शाती है। इसके अलावा, यह दर्शाती है कि पूरे जीवन के दौरान व्यक्ति को दुर्घटनाएं या गंभीर बीमारियां होंगी या नहीं होगी और किस उम्र में होगी। 

यदि जीवन रेखा (लाइफ लाइन) हथेली में नहीं हो : अगर आपकी हथेली में दूसरी रेखाय स्पष्ट है और केवल लाइफ लाइन अनुपस्थित है, तो यह एक अच्छा संकेत नहीं है यह एक खराब  स्वास्थ्य और एक कमज़ोर जीवन को इंगित करता है और आप अपने  पूरे जीवन के दौरान बीमार रोगग्रस्त जीवन व्यतीत करें या दुर्घटनाएं अधिक होंगी आपके जीवन में जिनकी वजह से आपका स्वास्थ्य खराब रहेगा । 

● लंबी, गहरी, निविदा और गुलाबी जीवन रेखा का अर्थ है कि आप रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी हैं। इसके विपरीत, लघु जीवन रेखा से पता चलता है कि आप बीमारी के लिए अतिसंवेदनशील हैं।

● एक मोटी और स्पष्ट जीवन रेखा यह इंगित करती है कि आप शारीरिक श्रम के जीवन के लिए उपयुक्त हैं और खेल में अच्छे हैं। इसके विपरीत, एक उथले और अस्पष्ट रेखा से पता चलता है कि आप में शारीरिक क्षमता की कमी हैं।

● अंगूठे के आस-पास के चारों ओर एक अर्धचंद्राकर जीवन रेखा से पता चलता है कि आप शक्ति और ऊर्जा से परिपूर्ण हैं। इसके विपरीत, यदि रेखा तंग है जो सीधे अंगूठे के करीब चिपक जाती है, तो यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि आपके पास सीमित ऊर्जा है और थका हुआ महसूस करते है और नीरस जीवन होना चाहिए । 





● दोगुनी या दोहरी जीवन रेखा : यदि आपके हाथ में लाइफ लाइन के साथ समानांतर चलने वाली एक दूसरी रेखा है, तो यह बतलाती है कि आपके पास बहुत अच्छी जीवन शक्ति है। विशेष रूप से, बीमारी के बाद आप स्वयं ठीक होने के लिए एक मजबूत प्रतिरोध है। 



● श्रृंखलित: एक जंजीरनुमा जीवन रेखा यह इंगित करती है कि आप खराब स्वास्थ्य के साथ पैदा हुए थे। आप ख़राब स्वास्थ्य से पीड़ित होंगे, खासकर  कमजोर पाचन तंत्र रहेगा । 

● द्वीप: यदि जीवन रेखा पर एक द्वीप है, तो यह निश्चित समय में बीमारी, दुर्घटना या अस्पताल में भर्ती का संकेत देता है। द्वीप का आकार रोग की गंभीरता और अवधि को दर्शाता है। 

टूटी हुई जीवन रेखा का मतलब 

एक टूटी जीवन रेखा एक अप्रत्याशित दुर्घटना, खतरे, आपदा या बीमारी को दर्शाती है। टूटा हुआ भाग जितना बड़ा होगा, उतना ही लम्बी बीमारी चलेगी।

● यदि दो टूटे हुए भागों को ओवरलैप होता है, तो आप गंभीर बीमारी के बावजूद ठीक हो सकते हैं अतिव्यापी लंबाई पुनर्प्राप्ति समय दिखाती है। 

● यदि टूटी जीवन रेखा के साथ समानांतर जीवन रेखा के ऊपर या नीचे या दो हिस्सों को जोड़ने वाला वर्ग है, तो आप आमतौर पर खतरा होने पर भी सुरक्षित रह सकते हैं और गंभीर रूप से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होने के बावजूद ठीक हो सकते है ।

जीवन रेखा की शाखाएं, प्रभाव रेखा और चिन्ह 

● अगर जीवन रेखा के ऊपर की ओर एक शाखा है, तो यह दिखाती है कि आप मेहनती, आशावादी, सकारात्मक और ज्ञान प्राप्त करने के लिए ललायित रहते हैं। आप जीवन के दौरान प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकते हैं। 

● अगर कई ऊंची शाखाएं हैं, तो यह दिखाता है कि आप महत्वाकांक्षी हैं और उच्च आदर्श के व्यक्ति हैं लेकिन बहुत रेखाएं दिखाती हैं कि आप सपने देखने वाले हैं और आप जमीन पर पैर नहीं रख सकते हैं फलस्वरूप सफलता में कमी आती है । 

● अगर जीवन रेखा के अंत में कई नीचे की शाखाएं हैं, तो यह इंगित करता है कि आपकी शारीरिक स्थिति में गिरावट आ रही है। इसके अलावा, आप हमेशा थका हुआ और अकेला महसूस कर सकते हैं। 

● यदि जीवन रेखा के अंत को पार करने वाले विकर्ण होते हैं, तो इसका मतलब है कि आप बाद के वर्षों के दौरान बीमारी से पीड़ित होंगे। 

● जीवन रेखा के मध्य भाग से स्पष्ट शाखा नीचे की ओर विभाजित होने का मतलब है कि आप अपने परिवार के साथ अलग रहना और विदेश में रहना चाहते है। 

● जीवन रेखा के अंत में छोटी रेखा निकली होना, इसका मतलब है कि आप में अच्छी प्राणशक्ति रहेगी। यदि आप अपने कैरियर को बाहर विकसित करना चुनते हैं, तो आप कुछ उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। 

गुच्छा या झाडनुमा आकृति होना : जीवन रेखा के शुरू होने पर गोपुछ होना जन्म में खराब स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्या को दर्शाता है और अंत में होने पर वृद्धावस्था के दौरान एक अकेला जीवन को इंगित करता है या फिर खराब स्वास्थ्य रहता है। 

जीवन रेखा पर क्रॉस, और सितारे , छोटी रेखाओ से कटना 






जीवन रेखा को छोटी रेखाओ का काटना और क्रॉस होना  

जीवन रेखा पर क्रॉसिंग या जीवन रेखा में कटौती करने वाली स्पष्ट रेखाओं से पता चलता है कि आपके जीवन में अनपेक्षित खतरों, बीमारी या दुर्घटनाएं हो सकती हैं अधिक स्पष्ट क्रॉस या छोटी लाइनें हैं, स्थिति आप से भी बदतर है। 

जीवन रेखा को काटने वाली कई छोटी रेखाय 
यदि जीवन रेखा के अंदर से कई रेखाएं काट कर पार होती हैं, तो यह दर्शाता है कि आपको आमतौर पर बहुत अधिक चिंताएं होती हैं, यह एक खराब स्वास्थ्य की स्थिति है या जीवन के दौरान अनगिनत कठिनाइयों से झूझना पड़ता है। 

जीवन रेखा पर तारा होना 
एक तारा तीन से चार छोटी लाइनों से बना होता है, यदि यह जीवन रेखा पर प्रकट होता है, तो यह बीमारी को इंगित करता है यदि स्टार आपकी टूटी हुई जीवन रेखा पर दिखाई देता है, तो आपको अचानक गंभीर बीमारी से पीड़ित होना पड़ सकता है। 

नितिन कुमार पामिस्ट 

Friday, September 29, 2017

Hand Images Of Indian Famous Dharam Guru ( Spiritual Leaders )



Vivekanand rare photo Vivekanand speech
 स्वामी विवेकानन्द- Spiritual Leader 
स्वामी विवेकानन्द ( बांग्ला: স্বামী বিবেকানন্দ) (जन्म: १२ जनवरी,१८६३ - मृत्यु: ४ जुलाई,१९०२) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत "मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों" के साथ करने के लिये जाना जाता है।  उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।

कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में जन्मे विवेकानंद आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे। वे अपने गुरु रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार हैं; इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है। रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत में मौजूदा स्थितियों का पहले हाथ ज्ञान हासिल किया। बाद में विश्व धर्म संसद 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की। विवेकानंद के संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया , सैकड़ों सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया। भारत में, विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

First Time I Have Seen Mahila Naga Sadhuvi (Lady Naga Saint) , naga sadhu, naga sadhvi

Marriage Lines On Hand Of Lady Saint 

Marriage Line is also called Line of Affection.  Marriage line does not necessarily show marriage it may only indicate attachment to someone male or female.  In other words this line can indicate anyone whom you consider a friend or loved one.  Marriage line is often found on porn star, prostitutes, unmarried person, celibates, saints (sadhu), lady saint (mahila sadhu) and kinnar, bisexual, hinjda, eunuchs, and in such cases indicates strong friendship.  So every marriage line does not necessarily represent marriage but it does represent an affection that you have felt or feel for someone. 


Param Shradhey Shri Radhe Maa fraud, Param Shradhey Shri Radhe Maa cheater

Hand Image Of Radhe Maa

Radhe Maa is an Indian spiritual leader based in Borivali suburb of Mumbai, Maharashtra, recognised by her controversial issues.  In September 2017 Haryana and Punjab High Court ordered police to file a FIR on her. Prompted by recent controversies surrounding self-styled godmen, Radhe Maa has been listed in one of the top fourteen of 'fake spiritual leaders' by Akhil Bharatiya Akhara Parishad,the apex body of Hindu sadhus. 




Sri Sri Ravi Shankar Hand Image

Ravi Shankar (born 13 May 1956) is an Indian spiritual leader. He is frequently referred to simply as "Sri Sri" (honorific) or as Guruji or Gurudev. He is a spiritual leader and founder of the Art of Living Foundation created in 1981, which aims to relieve individual stress, societal problems, and violence. In 1997, he established a Geneva-based charity, the International Association for Human Values, an NGO that engages in relief work and rural development and aims to foster shared global values.  For his service, he has received some of the highest awards of several countries including India, Peru, Colombia, and Paraguay. In January 2016, he was awarded the "Padma Vibhushan" by the Government of India.




Hand Images Of Neem Karoi Baba

Neem Karoli Baba (Hindi: नीम करौली बाबा ) or Neeb Karori Baba (Hindi: नीब करौरी बाबा) (1900 c. - September 11, 1973), also known to followers as Maharaj-ji, was a Hindu guru, mystic and devotee of the Hindu deity Hanuman.  He is known outside India for being the guru of a number of Americans who travelled to India in the 1960s and 1970s, the most well-known being the spiritual teachers Ram Dass and Bhagavan Das, and the musicians Krishna Das and Jai Uttal. His ashrams are in Kainchi, Vrindavan, Rishikesh, Shimla, Neem Karoli village near Khimasepur in Farrukhabad, Bhumiadhar, Hanuman Gadi, Lucknow, Delhi in India and in Taos, New Mexico, USA.


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Bapu Asaram Hand Images

Asumal Sirumalani, known as Asharam Bapu or just Bapuji by his followers, is a religious leader in India.[2] He preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being following the traditions of Advaita Vedanta. He was born on 17 April 1941. He left the home at the age of 23 and set out on his journey in the search of God. In the early 1970s, Asharam's followers built an ashram for him in Gujarat. By 2013, he had 400 major and minor ashrams in India and abroad, with numerous followers. In 2008, the death of two boys at his Motera ashram led to public protests, amid allegations that black magic was being practiced at the ashram which were later found false.[3] In 2013, Asharam Bapu was arrested when a 16-year-old girl accused him of sexually assaulting her in Jodhpur.



Indian Yoga Guru Baba Ramdev Hand Image

Ramdev was born on 25 December 1965 to Ram Niwas Yadav and Gulabo Devi at Hazaribag Ali Saiyad Pur village of Mahendragarh district, Haryana. Both of his parents were farmers. He claims he became paralyzed when he was two & half and was later cured by practicing Yoga. He studied Indian scripture, Yoga and Sanskrit in various Gurukuls (schools). He was the student of Acharya Baldevji in Gurukul Kalwa. Ramdev took sanyasi diksha and adopted the name Swami Ramdev from Swami ShankarDev Ji.  While living in Kalwa Gurukul in Jind district, Haryana, Ramdev offered free yoga training to villagers.  Then he moved to Haridwar in Uttarakhand, where he practiced self-discipline and meditation, and spent several years studying ancient Indian scriptures at Gurukul Kangri Vishwavidyalaya.


Marriage Lines On Hand Of Indian Saints (Sadhu) - Indian Palmistry


Hand Images Of Indian Sadhu-Pundit & Marriage Line On Their Hands - Palmistry

Marriage Line is also called Line of Affection. Marriage line does not necessarily show marriage it may only indicate attachment to someone male or female. In other words this line can indicate anyone whom you consider a friend or loved one. Marriage line is often found on porn star, prostitutes, unmarried person, celibates, saints (sadhu), and kinnar, bisexual, hinjda, eunuchs, and in such cases indicates strong friendship. So every marriage line does not necessarily represent marriage but it does represent an affection that you have felt or feel for someone.

Photo of Indian Sadhu from various temples and places of India - Hand Of Sadhu At Kumbh Mela , Hand of Nepal Sadhu Or Nepali Baba In Pashupatinath Temple , Hand image of Naga Sadhu (Nude Saint) , Bharat Sagar Jain Sadhu Spiritual Leader, Aghori Sadhu - Agori Baba - Aghori Baba - Tantrik Baba Palm Images Palmistry

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Amazing Longevity

Devraha Baba -

250+ Years Old





  1. Devraha Baba
    Saint
  2. Devraha Baba, also spelled Deoraha baba was an Indian Siddha Yogi saint who lived beside the Yamuna river in Mathura. He was known as "ageless Yogi with a secular image". He was known as a sadhu who preached harmony between religious communities.  
Jain Spiritual Leader

टोटके जो सच में काम करते है | Lal Kitab


टोटके ही टोटके 


1).  अपनी पत्नी को वापिस लाने का उपाय - टोटका 

आपकी वाइफ बेवफा है चरित्रहीन है या किसी और के साथ भाग गयी है या उसका किसी और के साथ अफेयर है या फिर वो नाराज़ हो कर अपने मायके जा कर बैठ गयी है और मुकदमा करने की धमकी दे रही है और घर आने को तैयार नहीं है तो आप लाल किताब का ये सरल उपाय कर सकते है ।

apani patni ko wapis lane ka upay -totka

सबसे पहले उपाय में पत्नी का कोई भी कपडा ले ले वो धोया हुआ न हो और उसका फ्लैग यानी झंडा बना कर के छत्त पर साउथ की तरफ की दिवार पर लगा दे ऐसा करने से आपकी पत्नी जल्दी घर लौट आएगी।

दूसरा सरल उपाय भोजपत्र के टुकड़े पर लाल पेन से पत्नी का नाम लिख देना और उसको शहद की शीशी में डुबो देना।  मंगलवार या शनिवार को करें तो ज्यादा लाभ होगा।

तीसरा उपाय इसके लिए आपको अपनी पत्नी के बाल चाहिए होंगे।  अगर आपके पास अपने पत्नी के बाल है या आप  हासिल कर सकते है तो आप उनको शनिवार या मंगलवार के दिन अपने घर के बाहर जला देना और जलाते वक्त प्रार्थना करनी है की वो वापिस घर आ जाय।

चौथा उपाय बेहद सरल है आपको इसके लिए अपने इष्ट-देवता से प्रार्थना करनी है और वहा जा कर फैरी दे कर आनी है कई बार इष्ट देवता ही बन्दे का काम कर देते है।

पांचवा उपाय इसके लिए आपको किसी भी दिन पीपल के पेड़ के दो पत्ते तोड़ने है शनिवार या मंगलवार करें तो ज्यादा अच्छा है।  दोनों पत्तो पर पत्नी का नाम लाल पेन से लिख दे और एक पत्ते  को घर की छत्त पर भारी पत्थर के नीचे दबा दे और दूसरे पत्ते को उस पीपल के पेड़ के नीचे गड्डा खोद कर के गाड़ दे और फिर रोज़ाना उस पीपल के पेड़ को एक वक्त पानी सींचे।  कुछ दिनों तक पानी उस पीपल के पेड़  में डाले और प्रार्थना कर ले की आपकी औरत वापिस घर लौट कर आ जाय और प्रेम पूर्वक रहे।


2). Exam Mein Pass Hona | Lal Kitab



lal kitab totke exam ke liye

लाल किताब के अजीबो-गरीब टोटके 

बार बार एग्जाम (exam) देने पर भी सफलता नहीं मिल रही है और पास होने की बजाय फ़ैल होते जा रहे हो और पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहा है तो एक बार बेहद सरल और अचूल नुस्खा लाल किताब का कर के देखें आपको सफलता जरूर मिलेगी।


ये उपाय आप इंटरव्यू (Interview) में सफलता प्राप्त करने के लिए भी कर सकते है।

एग्जाम में पास होने के लिए लाल किताब का टोटका 

जब आप इंटरव्यू या एग्जाम या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने जाय तो एक नीम्बू ले और उस नीम्बू के ऊपर चार लॉन्ग गाड़ दे और 21 बार इस मंतर को बोले "ओम श्री हनुमंते नमः " और फिर नीम्बू पर फूक मार दे और फिर  उसको अपने पर्स या बेग में रख ले और साथ ले कर चले जाय और फिर इंटरव्यू या एग्जाम दे कर लौटते वक्त उस नीम्बू को चौराहे या सड़क पर फैक दे घर पर न ले कर आए । भगवान ने चाहा तो आपको जरूर सफलता मिलेगी ।  


आप इस उपाय को सच्चे मन से करें आपको जरूर सफलता मिलेगी।


3). लाल किताब और प्राचीन उपायों से कष्ट निवारण 



लाल किताब और प्राचीन उपायों से कष्ट निवारण

प्राचीन ज्योतिष में ग्रहों को तथा बीमारी को शन्न करने के लिये जड़ी बूटियों का प्रयोग किया गया है। वैसे तो कुछ चीजें ऐसी हैं जिसके प्रयोग से बीमारी समाप्त होती हैं। जैसे अगर बिल्वपत्र और काली मिर्च दोनों पीसकर सुबह शाम लगातार दो महीना छानकर पीने से मधुमेह (शुगर) की बीमारी ठीक हो सकती हैं। अगर गरमी के मौसम में पीया जाये तो गरमी नहीं लगेगी।

लाल किताब में लिखा है कि अगर किसी का बुध खराब है तो वह फिटकरी से दाँत साफ करे। फिटकरी भी बुध हैं और दाँत भी बुध है इसलिए बुध को प्रदान करता है। पीपल में बहुत ऑक्सीजन होती हैं बाकी पेड़ प्राप्त को कार्बनडाइऑक्साइड छोड़ते हैं लेकिन पीपल २४ घण्टे ऑक्सीजन छोड़ता रहता है। अगर किसी को टोबी हो या ठिल की बीमारी हो और वह जातक ३.४ पीपल के के नरम नरम पत्ते खाया करें या पीपल की की नरम-नरम टहनी खाया करे तो उसके अन्टर बीमारी को रोकने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा हो सकती है और दिल तथा टीबी दोनों बीमारियौं ठीक होने की सम्भावना हो सकती हैं।

इसके साथ और भी कोई बीमारी होती है तो वह भी ठीक हो जाती है। पीपल को लाल किताब ने ब्रहमाजी माना है जो जन्म देने के स्वामी हैं। अगर किसी जातक के सन्तान नहीं होती वह भी भगवान का नाम लेकर रोज खाना खाया करे तो अवश्य सन्तान होगी। इसलिए पीपल को इतना महत्व दिया गया है। लाल किताब में मंगल और बुध दोनों को एक जगह होने से खराब माना है गंगा जल का प्रयोग करें तो ठोनों ग्रह शान्त रहेंगे। बरगद का पेड़ जिसे पंजाब में बरोटा कहा जाता है उस पर जल दूध चढ़ाकर उसकी मिट्टी से माथे पर तिलक लगाया जाये तो विशेषकर सूर्य 3भीर चन्द्रमा अच्छT फल ठेयो इसके पीछे यह राज है कि बरगद के पेड़ के पास जाकर उसके पत्ते तोड़ने से जो दूध निकलता है यदि, उसे पत्माशों में लगाकर खा लिया जाये तो पताशा बहुत ताकतवर होता है और सब प्रकार की बीमारी रोकने की उसमें शक्ति होती है।

कुछ लोग इन से छोटी-छोटी नरम दाटु खाकर भी पानी पीते हैं। उसकी दवाई भी बनायी जाती है। इसलिए इसका महत्व लाल किताब ने दिया हैं। जिसकी कुण्डली में बुध शनि एक साथ बैठे हैं वह आम का पेड़ धर्मस्थान में लगाये यह काम परोपकार का है। वृक्ष से छाया, लाकडी और ऑक्सीजन प्राप्त होती है तथा बरसात भी होने में वृक्ष सहायक होता है।

धर्म स्थान में जो भी जायेगा उसे खाने को मिलेगा। हर पूर्णमासी/ संक्रान्ति या शुभ ठिन पर एक पीला सब्बानी वाला पेठा (कडू) लंगर में दिया जाये तो घर में बीमारी परेशानी से बचाव होगा। लंगर में दिया गया दान सभी लोग खा सकते हैं जिसमें सेवा करने से ग्रह शान्त होते हैं कयोकि इस संसार में जितने-जीवन जन्तु हैं उन सबको भगवान ने बनाया है और भगवान के बनाये प्राणी की सेवा भगवान की भरकर शनिवार के ठिन पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे या चींटियों की जगह पर मुँह खुला रखकर रखें, जिससे चींटियाँ खा सके| यह बड़ा लंगर है। यन का काम करेगा|

जब भी घर बनवायें 3भपने घर में कच्ची जमीन जरूर रखें जिससे शुक्र का प्रभाव ठीक रहेगा। अगर घर का पूरा स्थान पक्का हो तो अपने घर में गमला रखें, उसमें तुलसी भी लग सकती है। रोज़ नहा कर
जल चढ़ाएं तथा २.३ पत्ने रोज़ रवाया करें।

केतु यदि बारहवें घर में हो तो लाल किताब में लिखा है कि जानक अपना अँगूठा मीठे दूध में डालकर चूसा करे तो केतु ठीक फल देगा। जातक का अँगूठा मनुष्य के दिमाग और तन्दुरुस्ती से सम्बन्धित है। जितना बड़ा अँगूठा होगा उतना अच्छा दिमाग होगा। अँगूठा चूसने से अँगूठा थोड़ा जरूर बढ़ेगा और जितना भी बढ़ता जायेगा उतना फल कुछ न कुछ जरूर ठेगा। जब किसी बच्चे को अपनी किस्मत अच्छी बनानी होती है तब वह लगातार १५,२० साल मेहनत करके पढ़ता है फिर कामयाब होता हैं। उसी तरह से किस्मत को बदलने
के लिये बहुत त्याग-तपस्या एवं योग करना पड़ता है।

अगर किसी को गुर्ट की बीमारी हो जाती है तब जातक अपने दोनों पैर के अँगूठे में मोटी से मोटी चाँदी की अँगूठी पहने। वहाँ पर चाँदी पहनने से गुर्द की बीमारी ठीक होगी। अब अगर देखा जाये तो जातक का पैर केतु है और चन्द्रमा चाँदी। चन्द्रमा से केतु का बुरा प्रभाव ठीक होता है। पैर के तथा हाथ के अँगूठे में जीवन शक्ति होती है और उसमें चाँदी धारण करने से केतु के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।

पहले की औरतों के पैर के जोड़ों में दर्द इस कारण नहीं होता था क्योंकि वे अपने पैरों में
शान्ति बनी रहती है।

चमत्कारी उपाय कुछ लोग अपनी कुण्डली या हाथ दिखाने के बाद यह जानना चाहते हैं कि उनके जीवन में जो कष्ट या परेशानी लिखी है, वह कष्ट या परेशानी कैसे दूर हों। इसके लिए उप्योतिष शास्त्र में जप, तप, व्रत, हवन, यज्ञ लिखा है। कुछ लोग करते हैं लेकिन उसके बाद भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता है और कई जगह पर लाभ गंगा जी नहाने से या पूजा पाठ करने से नहीं होता है। कर्म काण्ड करवाये जायें जिससे अधिक से अधिक लाभ हो सके। एक समय था कि गंगा जी में नहाने से किस्मत बदल जाती थी | सत्यनारायण भगवान का पाठ करने और हवा यान करवाने से, दान करने से क्रिस्मत बदलती थी और लाभ होता था। लेकिन अब उस रहस्य को ढूंढना होगा कि कौन से कारण हैं जिनके कारण यह उपाय अपना फ़ल नहीं दिखा पाते हैं। एक दुकानदार हम पिछले कई वर्षों से जानते है|

वह सदा अपने ग्राहक भी उसकी दुकान पर जाता है, वह ठगा जाता है। अब अगर वह पूजा पाठ कर भी लेता है तो क्या भगवान यह नहीं जानते हैं कि वह आदमी सबको ठगता है। अगर कोई किसी से अधिक पैसा लेकर सामान खराब ठेता है तो धीरे-धीरे सभी लोगों को यह पता चल जाता है और कोई कहता भी हैं कि मुझे उनकी दुकान से सामान खरीदने जाना है तो लोग मना कर देते हैं कि यह इनसान ठग है। धीरे-धीरे वह आदमी बदनाम हो जाता है और उसकी दुकान पर लोग आना-जाना बन्द कर देते हैं वह पूरा का पूरा घाटा खाना शुरू कर देता है।

ऐसे व्यक्ति को चाहिए कि चाहे वह हवन यज्न दान दक्षिणा भी न करें लेकिन जो भी व्यक्ति उसकी दुकान पर आये उससे सही पैसा लेकर सही सामान टे तो ग्राहक स्वयं वापस आयेगा और दो चार अन्य व्यक्तियों को और साथ लेकर आयेगा। अगर सही सामान बेच कर सही पैसा लेखागा तो उसके दवारा किया गया दान पुण्य हवन यज्ञ्न भी लाभदायकः होगा। अन्यथा दान पुण्य से कुछ प्रतशित फ़ायदा हो सकता है लेकिन पूरा लाभ होना कठिन होगा। कुछ लोग मजदूरों से काम नहीं देते हैं या मजदूरी काट लेते हैं। फ़िर पण्डित के पास जाते हैं या तान्त्रिक के पास जाते हैं, उपाय करवाते हैं। उपाय करने से उनके मन की तसल्ली हो जाती है, लेकिन ग्रह तो तभी ठीक होंगे जब एक मजदूर से काम करवा कर उसकी इज्जत व सम्मान के साथ उसकी मजदूरी दी जाये। कुछ लोग पूजा पाठ बहुत करते हैं। इन्सानियत से तो उन्हें प्यार नहीं होता। इनसान को जन्म देने वाला इनसान है जिसकी गोद में जन्म लेकर बढ़ा पला हैं, लेकिन फिर भी उनसे ईष्या करता है तो पाठ करने के कुछ प्रतशित लाभ तो होगा लेकिन पूरा लाभ प्राप्त नहीं होगा। जो मांस, शराब, अण्डा खाते-पीते हैं उनकी बुद्धि खराब हो जाती है और इसके लिए अधिक पैसे की जरूरत पड़ती है और अधिक पैसे के लिये इनसान गलत रास्ता अपनाता है या अपने परिवार का पालन न करके सिर्फ अपने खाने-पीने पर अधिक धयान देता है। जो इनसान अपने परिवार का पालन नहीं कर सकता है, वह हवळन यज्ञ करके बहुत कम लाभ प्राप्त होने पर मेहनत करके अपने परिवार का पालन करते हैं तो जो भी धार्मिक कार्य करेंगे भगवान की कृपा उनको अवश्य प्राप्त होगी। कुछ लोग अपने आई, बहळन, रिश्तेदार का हिस्सा हड़प कर लेते हैं।

बाद में पणेिंडलों या सन्नों के पास घूमते हैं। अगर ऐसे लोग गंगाजी नहा भी लेते हैं तब गंगा माता भी जानती हैं कि वह गरीबों का हिस्सा मार कर आया है। गंगा जी नहाने से लाभ बहुत ही कम होगा और फ़िर बोलेंगे कि हमने सब कुछ उपाय कर लिया लेकिन लाभ नहीं हुआ। दान पुण्य के दवारा उनका पालन हो सकता है लेकिन जब जातक ने इतना बड़ा अपराध किया है तो जरूरी नहीं कि दान पुण्य करने से वह मुकदमे से छूट जाये। हाँ, दान पुण्य करने से उसके परिवार को कुछ न कुछ राहत अवश्य मिलेगी। किन्तु अधिक नहीं।

कुछ लोग कामकाज या मेहनत तो करना नहीं चाहते सिर्फ उपायों के दवारा अपनी किस्मत बदलना चाहते हैं और जब उपाय करने से लाभ नहीं मिलता तब कहते हैं कि उपाय में कोई शक्ति नहीं हैं या ज्योतिष गलत है। कुछ लोग दान पुण्य करते हैं लेकिन उधार लेकर करते हैं और जिसका ले लिया उसका वापस नहीं किया किन्तु वह लोया पैसा वापस नहीं दिया। कुछ करते हैं। लेकिन जिसका भी पैसा
करते हैं, ऐसे लोग जितना मज़ों सुधारेंगे लाभ बहुत कम होगा।

कुछ लोग कहते हैं कि वे किसी को दान-दक्षिणा नहीं लेते हैं। न ही किसी से लेकर कुछ खाते हैं। अगर उनको कोई कुछ खाने-पीने को टेला है तब भी नहीं खाने-पीने हैं। लेकिन अगर किसी का पैसा ले लेंगे या सामान ले लेंगे, उसे वापस नहीं करेंगे। कुछ लोग जो ठान ठक्षेिपणा करेंटो उस मकान पर अपना नाम लिखवा देते हैं। उनके अन्दर नहीं हैं। भगवान कहते है कि में उसको पसन्द करता हूँ जिसका मन स्वच्छ और साफ हैं। रामायण में तुलसीदास जी ने लिखा है कि भगवान राम ने शबरी को अकिल का उपदेश देते हुए कहा था कि: सप्तम सो मोहि भय जग देखे। मो सो अधिक सन्त कर लेखे। अथत इस संसार में जितने जीव जन्तु हैं उन सब में मेरी हो ज्योति जलती है। और जिस दिन में मनुष्य के शरीर से अपनी उयोनि खींच लेना हूँ उस समय इनसान मर जाता है। इसलिए अगर कोई इनसान के साथ धोखा-धड़ी, ठगी करता है तो वह उस इनोसान से न करके मेरे से धोखा करता है। श्रीमद भगवद गीता में कृष्णजी ने बताया कि इस संसार में सभी प्राणियों में आत्मा के रूप में में ही कल्याण की भावना रखते हैं, उनसे भगवान खुश होते हैं। गुरु नानक देव जी महाराज ने गरीबों की मदद के लिए दिया। उन्होंने कोई जात-पात नहीं देखी, जो भी गरीब व दुखी थे
कहीं भी धर्मस्थान में जाने की अधिक आवश्यकता नहीं है।
नाः---म-न-यान- रचने से ग्रहों का उपाय करने से वस्तु की शान्ति करवाने से वही लोग पूरा लाभ उठा सकते हैं जो अपने दोन-ईमान पर खडे हो हक व हलाल की कमाई खाते हैं। जन-जन के कल्याण की भावना रखते हैं और उसकी हवन यज्न करवाने से लाभ होगा। जो अपने जाति धर्म के नाम 3भन्टर परमात्मा का अंश ठेखती हैं। राष्ट्रपति चाहते हैं कि उनके ग्रह शान्त हों तो वे अपने देश की जनता को
अपनी सन्तान समझें और उनके लिए होगा। अगर कोई मजदूर जिसको रोज के ८०,९० रुपये मिलते हैं, एक
अन्धो को रोटी खिला टेना है त्नो भी उसको उतना ही लाभ होगा जितळना हवन यज्ञ करने से होता है क्योंकि उसका सामथ्र्य ही बहुत कम है। कुछ लोग अपने आस-पास के लोगों के, रिश्तेदारों दवारा टी गयी चीजों का उपयोग नहीं करते कि कहीं कुछ करके अर्थात भूत-प्रेत या जादू-टोना करके तो नहीं दे रहे हैं। भूत-प्रेत या
दैवीय शक्ति किसी के हाथ की कठपुतली नहीं होती जिस प्रकार अच्छी विदया प्राप्त करने के त्रिष्ये १०,१५१ साली पठ्ठना पडता हे उसी प्रकार भगवान को खुश करने के लिये जन-जन का कल्याणा तथा त्याग-तपस्या करनी होती है तब भगवान की कृपा प्राप्त होती है। कहने का मतलब है कि इस संसार में वही महान हैं जिसके पास कोई शक्ति है और जब व्यक्ति ने इतना त्न्या-त्नप-या करके शक्ति प्राप्त की है तो वह उसे अच्छे काम में लगायेगा जिससे गरीबी दूर हो, बीमारी दूर हो ना कि अपने जीवन की मेहनत किसी को दु:ख, कुछ पण्डित लोग भी लोगों को अमित कर देते हैं कि आपके घर पर किसी ने कुछ कर दिया है।

यह बनाने से लोग पण्डित से उपाय करवायेंगे और उनकी जेब में भी कुछ जायेगा ऐसे पण्डित को भी भगवान से डरना चाहिए कि जातक को सही रास्ते पर लगायें जिससे वह भगवान खुश होंगे। किसी को गलत उपाय बताने या अमित्न करने से बताने वाले के खुद के ग्रह खराब हो जायेंगे और जातक कष्ट में आ जायेगा। आस पड़ोस, परिवार में झगड़ा-लड़ाई न करके प्यार मुहब्बत के साथ रहने से भगवान की कृपा होती है। बेईमानी, पाखण्ड का कारक राहु है और अब जातक जितना ये सब करता है तब राहु खराब होकर जातक को नष्ट कर देते हैं। आम जनता शनि एवं पहले उठे और यह देखें कि उठने समय दायें नाक से ३वास आ रहा है अथवा बायें नाक से। अठार दायें नाक से आा रहा है तब भगवान से प्रार्थना करें कि 'हे भगवान आज मेरी आयु में से एक दिन समाप्त हो रहा है इसलिए मेरा आज का टिन सुख शान्ति से बीते और यह आपको कृपा होगी, क्योकि इनसान लो कुछ नहीं कर सकता है, नौ महीने रहता है जब उसकी हिम्मत कहाँ होती हैं।

जब बीमार हो जाता है तब वह करवट भी नहीं पलट सकता है और न अन्न खा सकता है। गरमी के मौसम में पंखा कूलर लगाकर ठण्डा करना चाहता है। एक कमरा कठिनाई से ठण्डा होता है लेकिन अगर भगवान की कृपा होती है तो १० मिनट में वर्षां होकर ठण्डी हवा चलने लगती हैं और सब जगह ठण्डापन हो जाता है। इसलिए गुरु नानक देव जी महाराज ने लिखा है कि भगवान् की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है। हे भगवान, हम आपकी सन्तान हैं। मेरे ऊपर अपनी कृपा बनाये रखें क्योंकि जो कुछ मेरे पास है वह आपका दिया हुआ है। और मेरे हाथ से किसी का बुरा न हो और इतनी शक्ति दें, जिससे में अपनी मेहनत से कमाकर अपने परिवार का पालन कर सकूं।' फिर जिस नाक से ३वास आ रहा है वही हाथ अपने सिर पर फेर लें और वही पैर जमीन पर पहले रखें। फिर अपना घर का सारा काम करके तुलसी को जल चढ़ाकर ३,४ पत्ते तुलसी के खाकर जल पीयें। अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगायें क्योंकि तुलसी लक्ष्मी माता की बहन है और तुलसी की हवा घर में जहाँ पर जाती हैं, पवित्र हो जाता है। और सब बीमारी दूर हो जाती है। घर में तुलसी ऐसी जगह लगानी चाहिए जहीं उसे अठर-सन्मान प्राप्त हो।

नहाने के बाद में सूर्य भगवान तथा शंकर भगवान को जल चढाये तथा रूद्राक्ष का एक ठाना उाले में अवश्य धारण करें और रोज शंकर भगवान का जप करें कि हे भगवान आप दवारा दिया यह रहें | किमी गरीब कन्या की मदद करने से सारे कार्य होती हैं |


5). लाल किताब के उपाय कब करें , कैसे करें, क्यों करें और कौन-कौन कर सकता है ? 

लाल किताब के उपायों को अपनाने से पूर्व विशेष सावधानी बर्ते 


लाल किताब में दर्शाये गये उपाय/टोटके किसी भी समय आरम्भ किये जा सकते हैं परन्तु एक बार आरम्भ करने के पश्चात् 43 दिनों तक निरन्तर करते रहें।

यदि इन 43 दिनों के भीतर किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न हो जाये या भूलवश आपसे एकाध दिन की गड़बड़ी हो फिर परिस्थिति वश आप निरन्तर न कर पाये हों कुछ दिन रूककर पुनः 43 दिनों एक निरंतर प्रयोग करें ।

जब तक 43 दिनों तक निरंतर उपाय/टोटका नहीं किया जायगा तब तक उसका पूर्ण फल मिलना अनिश्चित है ।

यदि उपाय करने से पूर्व दूध में धोकर चावल पास में रख लिया जाय तो उपायों का कुछ प्रतिशत फल अवश्य मिलता है  ।

लाल किताब के उपाय/टोटके दिन के समय (सूर्य की साक्षी में ही करें) - सूर्योदय से पूर्व के एवं सूर्योदय पश्चात् किये गये उपायों का कोई फल न मिल पायेगा लेकिन हानि होने की संभावना हो सकती है।

लाल किताब में कई उपाय रात्रि के समय करने को बतलाया है उन्हें रात्रि के समय करना ही उचित होगा ।

 लाल किताब के टोटके पीड़ित व्यक्ति को स्वयं ही करने चाहिए लेकिन यदि वह असहाय है और स्वयं नहीं कर सकता है उस स्थिति में हाथ का स्पर्श करवा कर किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा उपाय किये जाने चाहिए ।


Lal Kitab Ke Powerful Upay - Astrology

lal kitab ke asardar upay

Bhartiya jyotish shastra mein lal kitab ka visesh isthan hai.  Lalkitab mein sabhi samasyo ke liye powerful totke batay gayein hai.

Aap sabhi ko malum hai ki lal kitab mein sabhi samasayso ke powerful tone-totke aur upay diye hue hai.

Sabhi graho aur rashiyo ke upay bhi laal kitab mein diye gaye hai bus aapko sharddha se un totko ko karna hai.


1).  Aapke ghar mein bimari lagi ho-

Bahut se logo ke ghar mein bimari lagi hoti matlab ghar bimariyo ka ghar hota hai. Ek ghar ka member theek hota hai to doosara bimar ho jata hai matlab sari ghar ki kamai (income/salary) dawai aur tests karwane mein hi chali jaati hai aur phir bhi bimari jaane ka naam nahi leti hai.

Aise mein aap ye lal kitab ka tested aur powerful totka kar ke dekhiye aapko labh hoga-

Apne ghar ke bahar main gate ke darwaze ke bahar jo sadak hai us sadak ke aur main gate ke beech mein se ek chutki mitti utta lijiye aur ab is mitti mein thodi si laal mirch pisi hui , raai aur namak kisi katori mein daal kar mila dijiye. Ab inko us vykti jisko najar lagi hui hai ya bimar hai (ilaaj nahi lag raha hai) uske upar se 7 baar clockwise ghuma lijiye aur phir garam tawa (jis par roti sekte hai) par daal dijiye aur thanda hone ke baad usko sadak par daal dijiye. 

Aisa karne par bimar vykti ko turant labh milega aur fast recovery karega.


2). Kaam dhande ya dukaan par buri najar lagi ho-

Bahut logo ki sikayat hoti hai ki kaam dhanda sab band ho gaya hai aur koi income nahi hai aur bus ghata ho raha hai.

Waise to kisi acche jyotishi se mil kar apni kundli dikway ki aapka samay kaisa chal raha hai aur us ke anusaar aapko upay karne chahiye.

Vyappar mein nuksaan na ho uske liye aap apni tijori mein ek dibbi mein "ek chandi ka sikka jis par laxmi ji ho" aur "sindoor" aur "ek haldi ki gaanth" aur "ek akhandit supari" aur "kuch daane peeli sarson" aur "paan ka patta" le le aur in sabhi ko ek laal kapde mein bandh kar ke apni tijori mein rakh le.  Aapko kuch hi dino mein vyapaar mein labh najar aayga.


3).  Dushman se chutkara pane ke totke-

Aajkal sabhi log ristedar aur dushman se paresan hai.  Adhiktar ristedar hi dushman hote hai ya phir office ya naukri mein boss ya koi sathi hi dushmani nikalta hai.  Yadi aapko koi vykti bewajah paresan kar raha hai ya phir aapko nuksan pahuchana chahata hai to aap ye sateek upay kar ke labh prapt kar sakte hai.

Aap apne dushman ka naam ek peepal ke patte par laal pen se likh de aur us peepal ke patte ko ghar ki chatt par ulta rakh de aur us par bhari patthar rakh de.  Aisa karne par aapka dushman aapke control mein aa jaayga aur aapko nuksan nahi pahochayga. 


4).  Ghar wapis bulane ke liye totke-

 Yadi aapka koi parichit ya saga-sambhandhi ghar se bhaag gaya hai matlab naraz ho kar chala gaya hai to aap ye upay kar sakte hai.

Aapko us insaan ka pahana hua kapda lena hai jaise shirt ya rumaal ya aur koi kapda aur phir aapko us kapde se jhanda bana kar ghar ki chatt par south ki diwar par laga dena hai.  Aisa karne par wah vykti turant wapis ghar aa jaayga ya aapko uski khabhar (news) mil jaaygi ki wah kaha par hai.


5). Pati ka pyar pane ka totka/mantra-

Aapke pati aapse naraz rahte hai aur aapki baat nahi sunate hai aur aapko ghar kharch chalane ke liye paise nahi dete hai aur sex mein bhi jyada roochi nahi lete hai to aap ye upay karein aapke pati aapko pyar karne lagengey aur aapki baat manenge.

Jo perfume aap lagati ho us perfume ki bottle par aap apne pati ka naam 21 baar bol kar ek baar fook maar de aur phir us perfume ko daily apne pati ke shirt par spray kar diya karein.

Periods ke doran aap pad par apne husband ka naam lipstick ya laal pen se likh kar pahan le aur phir doosare din usko jala de aur uski raakh sadak par faik de. 

to be continued.....








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